PRIDE OF DINDORI | डिंडौरी के लोकनृत्य को दुनियाभर में पहुंचाने वाले आदिवासी कलाकार अर्जुन सिंह धुर्वे को राष्ट्रपति ने प्रदान किया भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक अलंकरण 'पद्मश्री'



डीडीएन रिपोर्टर | डिंडौरी/नई दिल्ली

डिंडौरी जिले के समनापुर ब्लॉक के छोटे से गांव धुरकुटा के रहने वाले प्रतिष्ठित लोकनर्तक अर्जुन सिंह धुर्वे को सोमवार को भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक अलंकरण 'पद्मश्री' प्रदान किया गया है। उन्हें नई दिल्ली में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह-II में वर्ष 2022 के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया। आदिवासी जिले के लोकनृत्य को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाले लोक कलाकार व सेवानिवृत्त शिक्षक अर्जुन सिंह और लोकचित्रकार दुर्गा बाई व्याम का नाम 25 जनवरी को पद्म अवॉर्ड के लिए घोषित किया गया था। दुर्गा बाई को यह सम्मान 21 मार्च को समारोह के पहले संस्करण में दिया जा चुका है, जबकि आज अर्जुन सिंह ने अवॉर्ड प्राप्त किया। इस अद्वितीय उपलब्धि के लिए राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत तौर पर अर्जुन सिंह को बधाई दी और उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की।



संघर्षों से भरी रही ज़िंदगी लेकिन जो ठाना, कर दिखाया; पत्नी ने हर कदम पर दिया साथ

बैगाचक क्षेत्र के धुरकुटा निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक अर्जुन सिंह धुर्वे की ज़िंदगी संघर्षों से भरी रही, लेकिन वह कभी डिगे नहीं और जो ठाना, कर दिखाया। वह बैगा जनजाति से पहले पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक रहे हैं। उन्होंने अपनी टीम के साथ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित विदेशी अतिथियों के सामने भी बैगा नृत्य की प्रस्तुति दी चुके हैं। 12 अगस्त 1953 को परसा सिंह और लहरो बाई के घर जन्मे अर्जुन सिंह ने समाजशास्त्र विषय से एमए के साथ बीएड की शिक्षा प्राप्‍त की है। उनकी संघर्षयात्रा में पत्नी लमिया बाई ने हर कदम पर भरपूर साथ निभाया।



पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. सिंह के निवास पर भी दे चुके प्रस्तुति

वर्ष 2005 में नई दिल्ली के इंडिया गेट में परेड के दौरान अर्जुन सिंह और उनकी टीम ने बैगा परधानी नृत्य की दिलकश प्रस्तुति दी थी। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निवास पर भी लोकनृत्य की छटा बिखेर चुके हैं। वहीं, उज्जैन सिंहस्थ के लोक उत्सव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला सहित अनेक नामी-गिरामी लोक मंचों पर अर्जुन सिंह एंड टीम बैगा नृत्य की प्रस्तुति दे चुकी है।



1976 में सहायक शिक्षक से शुरू हुआ शिक्षण का सफर, 2015 में हुए प्रधानपाठक के पद से रिटायर

अर्जुन सिंह 19 नवंबर 1976 में सहायक शिक्षक बने, 1994 में उच्च श्रेणी शिक्षक और 2008 में प्रधान पाठक के पद पर पहुंचे। 31 अगस्त 2015 को अर्जुन सिंह सेवानिवृत्त हो गए। वर्ष 1993-94 में उन्हें जनजातीय संपदा के कलात्मक संवर्धन विकास के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने तुलसी सम्मान से विभूषित किया था। उन्होंने डिंडौरीडॉटनेट को बताया कि बैगा परधानी नृत्य बैगा जनजाति का मुख्य नृत्य है, जिसमें बैल, मोर, हाथी, घोड़ा आदि के मुखौटे में नृत्य किया जाता है। वह इसी शैली को दुनियाभर में प्रचारित-प्रसारित कर रहे हैं।
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